दूसरा टिका - हम टोकन बांट रहे है!
यह कहानी मुंबई की ही है।
सुबह ९ बजे शुरू होनेवाले टीकाकरण के लिए लोग रात के ३ बजे से लाइन लगाते है, क्योंकि भैया, हम रोज़ टोकन बांट रहे है।
शादी विवाह में २५-५० से ज़्यादा मौजूद नही रहे सकते पर टीकाकरण की इस कतार में एक ही साथ, एक ही समय पर और ३००-६०० बुजुर्ग रोज़ दिखते है। क्योंकि भैया, हम टोकन बांट रहे है।
ट्रैन, बस, आधार, पासपोर्ट हर किसी वे लिए अपॉइंटमेंट से काम करते है पर टीकाकरण के लिए कृपया कतार लगाए, क्योंकि हम टोकन बांट रहे है।
१००-१५० टोकन बाटने के बाद यदि आपका नंबर ना लगे तो चिंता मत कीजिए, कल सुबह फिर से कतार लगाइये, हम तो रोज़ टोकन बांट रहे है।
पहेले टिके की तारीख मौजूद है सरकार के पास और चाहे तो ६०+ को उनके दूसरे टिके के नियत दिवस बुला सकती है पर नही, हम तो रोज़ टोकन बांट रहे है।
आज भी कई ऐसे बुजुर्ग होंगे जिनकी दूसरे टिके की सीमा अवधि पर हो चुकी है, रोज़ कोशिश करते है टिका लेने की पर असफल रहेते है, क्योंकि भैया हम तो रोज़ टोकन ही बांट रहे है।
४५/ ६०+ वाली जनता को वैश्वीकरण के बाद भी हम राशनिंग की कतार का अनुभव देकर ही रहेंगे क्योंकि हम तो रोज़ टोकन बांट रहे है।
और इन सब के बीच कोई जुगाड़ लगा ही लेते है जुगाड़खोर कतार काट कर पीछे से भीतर चले जाने का, क्योंकि हम तो रोज़ टोकन बांट रहे है।
मुंबई के बुजुर्ग और उनके परिवार की हर सुबह यही कहानी है।
शांतता ठेवा।
कृपया कतार में रहे, हम रोज़ टोकन बांट रहे है।

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