We The People - हम लोग
वोह कहेते हैं लोग भावुक हो,
सब भीड़ बन चले हैं |
क्यों देखते नहीं वोह की,
एक युग से संयमित,
एक बात से त्रस्त,
एक क्रांति का कारवां बन चले हैं |
भूल हमारी भी हैं की,
सब चलता हैं कहेके,
थोडा ऊपर नीचे करते रहे हैं |
बचपन मैं एक चोकलेट से शुरू हुवा दौर,
नेताओ के " लाख करोडो" के गफ्ले तक चले हैं |
हमें भी आदत सी हैं,
अपने वोट के अधिकार की अवहेलना करने की |
स्वातंत्र्य देवी के ये प्रसाद का ,
घोर अपमान करने की |
गलती करने पे चालान कटवाने की जगह,
२० -५० का पत्ता सरकाना मुनासिब मानते हैं |
मामू को सस्ते मैं पटा दिया कहेके,
कूल बनना पसंद करते हैं |
फिर हम ही कहेते हैं की,
ये खादी और वर्दी वाले साले सब चोर हैं,
पर भूल क्यों जाते हैं हम की,
हमारी नैतिक निश्फल्ताओ मैं ही,
उनकी सफलताओ की भोर हैं |
माना की उनके पास अमर्यादित सत्ता हैं,
पर सच्चे साहस के सामने वोह भी बिखर जाती हैं |
कितनी बड़ी ही जूठ की दीवार वोह बना दे,
सच और नैतिकता की एक किल से वोह भी ढेर हो जाती हैं |
उदाहरण कई मिलेगे इतिहास के पन्नो मैं इस कहानी के,
पर अवसर आया हैं अब घडी लिखने नया इतिहास,
उन्हें बदलने हम उतरेंगे रास्तो पर,
करेंगे अनशन और आम्रनान्त उपवास |
पर एक नज़र अपने गिरेबान मैं भी झाँक लेना,
ताकि अपनी कथनी और करनी मैं हो संतुलित संवाद |

Good one, Dilip.. :)
ReplyDeleteThank You so much Ambili
ReplyDelete