एक तिनका आसमान
अरमान अपने आसमान का लिए,
उड़ता लड़ रहा हैं हर एक परिंदा |
तिन्खे सा अस्तित्व हैं पर,
एक जिद्द पे अड़ा हैं यहाँ हर एक बंदा |
बिखेरेंगे वोह क्या हमें अपने लक्ष्य से,
जो खुद ही अपनी भूलो पे नहीं हैं शर्मिंदा |
ये आखरी मौका हैं सुधरने का पास तुम्हारे,
आगे ना मिले ऐसा मौका कभी आइन्दा |
संभल जाओ इससे पहेले की हमारी व्यथाए,
बन जाए तुम्हारे गले का एक आखरी फंदा |
हम तोह हैं सर फिरे सिकंदर,
जो अपने अरमानो के लिए मरकर भी रहेंगे जिंदा |

Very true, nicely written...apt for today's situation
ReplyDeleteShukriya Daman...Khayal toh aaj he ke paristhiti ke anuroop hain.
ReplyDeleteBahot khuub likha hai..
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