मेरा मुंबई एक और बार शहीद हो गया...

मेरा मुंबई एक और बार शहीद हो गया,
पर सब कहेते हैं की मैं बच गया, मैं बच गया |
किसी ने इस धमाको को भारत के दिल पर हमला कहा,
पर Bypass वाले क्या समजे की मैंने आज क्या खोया?

आज शाम पोने सात बजे,
हुवा एक धमाका मुंबई की खाऊ गल्ली मैं |
दो बार खून की होली देख चूका ज़वेरी बाज़ार,
फिर एक बार जला आतंक की इस अन्सुल्जी पहेली मैं |

आज शाम छोटी सी गलियों मैं,
बड़े अरमानो को जोतत्ता एक आम आदमी मर गया |
कुछ होश मैं आये मुंबई उससे पहेले,
आतंकी एक और धमाका ओपेरा हाउस मैं कर गया |

मेरा मुंबई एक और बार शहीद हो गया...

मुंबई भी कोसती होगी अपने नसीब को अक्सर,
की हमेशा उसके पंचरंगी दामन मैं,
लाल ही रंग क्यों उभर के आया?
क्यों मुम्बैकर के जिंदगी की लकीरे,
महोताज़ हैं किसी आतंकी के इरादों की?
जिसने कभी Timer से जिंदगी को थमा दिया |
तोह कभी गोलिया दाग जिंदगी से उन्हें बेदखल कर दिया |

मेरा मुंबई एक और बार शहीद हो गया...

बन गया बस स्टॉप कबूतरखाने का,
फिर एक बार यमराज तक ले जानेवाला स्थान |
और Breaking News की लहर चली हर न्यूज़ चैनल पे,
बताने कितने घायल हुए,
और कितने चले शमशान और कब्रिस्तान |

मेरा मुंबई एक और बार शहीद हो गया...

साँसों से भी तेज़ बदल रहे थे,
लोग चैनल घरो पे,
लेने जायजा आज के इस तीन ब्लास्ट का |
फ़ोन भी सारे Busy थे,
पूछने अपनों की खेरियत,
ऐसा ही कुछ किस्सा था आज की इस रात का |

मेरा मुंबई एक और बार शहीद हो गया...

कर रहे थे नेता Appeal,
शांति बनाये रखने की |
विश्व कर रहा था निंदा,
आतंकियों के इस घिलोने कृत्य की |
कहे रहे थे सब मुम्बैकर को की,
हमेशा की तरह Resilient ही रहेना |
मैंने कुछ इसे ऐसा समजा की,
कितने भी हो धमाके,
कितनी भी चले गोलिया,
इस बार बच जाओ तोह,
अगली बार मरने तैयार रहेना |

पर मेरा मुंबई एक और बार शहीद हो गया..

क्यों किसी काले कोट मैं क्षमता नहीं,
कसाब का सर कलम करे वोह दफा ३०२,
जल्द से जल्द साबित करने की?
क्यों किसी खादीवाले मैं ताक़त नहीं ,
पड़ोसियों की कायरता को ,
एक करार सा जवाब देने की?

मेरा मुंबई एक और बार शहीद हो गया...

क्यों हर बार मैं ही मैं मरता हूँ,
हर एक धमाके, हर एक दंगल मैं?
आज की भी तवारीख यादो से मिट जायेगी सभी के,
और खादीवाले कल फिर से कहेंगे की,
यहाँ सब कुशल हैं, सब मंगल हैं |

पर, मेरा मुंबई एक और बार शहीद हो गया,
और सब कहेते हैं की मैं बच गया, मैं बच गया |

Comments

  1. Again repetition of the same story - MUMBAI is not safe. Still you will find people from all parts of India in this small city, making it all the more unsafe for us to stay. So we have to live with the fact that today it was someone else tommorrow it will be us who will be attacked - either by a bomb or by a Kasab and if nothing else by our dear policiticans who know the game all too well.

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  2. Good One Dilip....

    Mumbaikar is now used to it ... as next day every thing was like it was before 6:45 pm.....

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